बुद्धं शरणम् गच्छामि

अरे जब भष्मीभूत होना तो फिर गुमान किये हैं क्यो   छोड़कर सब जाना तुझको तो फिर अभिमान किये है क्यों   लगाया तन पर चंदन है मगर मन मैल भरा पापी   भटक मंदिर मस्जिद या चर्च मिले भगवान तुझे फिर क्यों   दोहरी जीवन जीने में लगाए खूब …

Back to Top