हम शीश काटकर लाएंगे

जंग ए आज़ादी की ख़ामी हम फिर से ना दुहरायेंगे तुम एक तमाचा मारोगे हम शीश काटकर लाएंगे   हम चरखा नहीं चक्रधर हैं बारुन्दों में पालित पोषित हम शिष्ट ,सभ्य ,भारतवासी मर्यादित ,अखण्ड ,हिमगिरि शोभित   जो भृकुटि जरा तरेरे तो, कर खंड मुंड लहरायेंगे तुम एक तमाचा मारोगे, …

आगे बढ़ते जाना है | 

गिरगिट क्या, हमने तो इंसानो को रंग बदलते देखा है , आसमानो से लहराते बदलो को जाते देखा है |   पर तुमको आगे बढ़ते जान है क्यूंकि हार की बाद हमने जीत को आते देखा है   बेरंगीन तस्वीरो के रंग हमने निकलते देखा है और बेरंग तस्वीरो को …

Back to Top