सत्यमेंव जयते

सत्य परेशां हो सकता है
पर कभी पराजित हो भी क्यों
सत्य सताया जा सकता है
पर कभी हार ये माने क्यों

सत्य में है स्वावलंबन
सत्य में ही ब्रह्म है
सत्य में गौरव छिपा है
सत्य में अवलंब है


सत्य में ही न्याय है
सत्य ही सर्वस्व धन
सत्य स्वयम्भू ब्रह्म निर्मित
सत्य रखता स्वस्थ मन

सत्य वीर साहसी
सत्य सनातन धर्म है
सत्य ,ब्रह्म एक है
सत्य चक्षु पारखी


सत्य में ही राम बसता
सत्य श्याम कृष्ण है
सत्य में प्रसिद्धि वास
यथा विदित, हरिश्चन्द्र हैं

सत्य में सर्वस्व गुण
सत्य शक्तिमान है
सत्य ग्राह्य व्यक्ति देखो
स्वयं पालित मान है


सत्य का कर अनुसरण
सुख साधु बौद्ध बन गया
सत्य की निज शक्ति पा
जीवन विकट से तर गया

।।धर्मेन्द्र नाथ त्रिपाठी’संतोष’।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to Top