राम मंदिर निर्माण

500 साल … बहुत संघर्ष रहा ….राम नाम को मिटाने की भरपूर कोशिश हुई …. राम मंदिर को विध्वंस करने वाले … टेंट से निकले हुये समुदाय की कोशिश तो बहुत थी … कि सब धूल धूसरित करने के बाद अब न राम बचेंगे और न राम का कोई नामलेवा .

..पर धन्य हो विप्र जन … जिन्होंने अपनी जिह्वा पर रामचरित मानस के नाम पर राम नाम को हर विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रखा ….

अपार संघर्ष और बलिदानों के बाद भी ….

बहुत दावेदार हैं … सबका अपना अपना योगदान भी है …..

पर आजादी के योगदान की तरह … भगवान रामलला के योगदान में … असल लोग न भुला दिये जायें ….

मेरा सिर्फ यही प्रयास है …

रामलला के बनाये हुऐ भव्य मंदिर की अनाम नींव में बहुत खून और पसीना दफन है ….

..इनमें से ही एक हैं … 90 साल के वरिष्ठतम वकील … के. परासरण जी … जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भगवान रामलला की ओर से पक्ष ही नहीं बल्कि जोरदार पक्ष रखा ….

शास्त्रों के जानकार पद्मविभूषण माननीय .. के. परासरण .. राज्यसभा सदस्य ही नहीं बल्कि … देश के दो बार अटॉर्नी जनरल भी रह चुके हैं ….

मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने तो …. के. परासरण को इंडियन बार के पितामह की उपाधि तक दी थी …..

अपनी व्यावसायिक ईमानदारी के लिये … हमेशा हर वर्ग और समाज के लिये वे हमेशा सम्मान के पात्र रहे …

भगवान रामलला के मामले की सुनवाई के दौरान … उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि …

अपनी अंतिम सांस लेने से पहले वह इस केस में पूर्ण न्याय चाहते हैं …..

90 वर्ष के इस भक्त की युवा भक्ति को ही सिर्फ देख लीजिये …..

………. ए यस पँवार

 

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