महाना बनो कुछ नाम करो

जो भाई भरत की चाह रखो,
तो मर्यादित श्री राम बनो
जो मान धर्म का रखना है,तो
हरिश्चन्द्र सा महान बनो


यदि दान की चाहत है दिल मे,तो
सीख कर्ण से ले डालो
यदि लगन सीखने की तुझमें तो,
एकलव्य का तीर कमान बनो

गंगा की निर्मल धारा बन,
कल कल निनाद तो होने दे
मन पावन कर,धर ध्यान ,दृष्टि
तन मन का सुध बुध खोने दे


सिद्धार्थ से बन तू बुद्ध,
धरा पर प्रेम पाश संचारित हो
महावीर अहिंसक,मुक्ति मार्ग
सन्मार्ग ,सत्य सत्यापित हो

हो शौर्य ,सुभाष,विस्मिल का जोश
नवयुवको में संचारित हो
हो भगत सिंह सा शेर पथिक
वीरत्व भाव मन पारित हो


नवयुवती करके सिंह नाद ,
दुश्मन के छक्के छुड़ा सके
वीणापाणि,चामुंडा ,सती
हर दिव्य तेज को सजा सके

हर हर शम्भू का ओज लिए
जय हिंद घोष नभ गर्जन हो
तेजस,राफेल सुसज्जित कर
हर दुश्मन मन का मर्दन हो


गौरान्वित हो विज्ञान ,ज्ञान से
युक्त हिन्द का हर प्रहरी
आस्तिक,विशुद्ध,भावातिरेक
बोले शिव शिव शिव हर लहरी

ये पढ़े। ……….

प्रणाम……..।।धर्मेन्द्र नाथ त्रिपाठी”संतोष”।।

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