हम शीश काटकर लाएंगे

जंग ए आज़ादी की ख़ामी हम फिर से ना दुहरायेंगे

तुम एक तमाचा मारोगे हम शीश काटकर लाएंगे

 

हम चरखा नहीं चक्रधर हैं बारुन्दों में पालित पोषित

हम शिष्ट ,सभ्य ,भारतवासी मर्यादित ,अखण्ड ,हिमगिरि शोभित

 

जो भृकुटि जरा तरेरे तो, कर खंड मुंड लहरायेंगे

तुम एक तमाचा मारोगे, हम शीश काटकर लाएंगे

 

हममें बसता है भगत ,बोस, बिस्मिल ,आज़ाद का जोश भरा

बटुकेश्वर ,मंगल सा साहस, सावरकर सा है होश भरा

 

मदहोश न कर ,जरा होश में रह जय हिंद ,हिन्द जय गाएंगे

तुम एक तमाचा मारोगे, हम शीश काटकर लाएंगे

 

खंडित कर डाला भारत को चुपचाप जहर हम पी चुप हैं

पर अगर गुस्ताखी की फिर सोचे बतला दें गोडसे सचमुच हैं

 

भारत अखंड सिरमौर रहा हम वंदे मातरम गाएंगे

तुम एक तमाचा मारोगे हम शीश काटकर लाएंगे

 

जय हिंद जय भारत

 

प्रणाम।।

धर्मेंद्र नाथ त्रिपाठी

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