निर्गुण भजन – चिंता चिता समान

निर्गुण भजन

हे साधो चिंता चिता समान

हे साधो चिंता चिता समान

राम नाम का सुमिरन कर ले

त्यागहु तम अभिमान

हे साधो चिंता चिता समान

पंचतत्व मिली बनी है शरीरा

जा पर तोहे गुमान, रे साधो जा पर तोहे गुमान

चार जनि तोहे पहुंचा दैंहिमरते ही शमशान

हे साधो चिंता चिता समान

हे साधो चिंता चिता समान

धन दौलत तोहे बचा नहीं पैहैं

सब छोड़ी तू जइहो सामान

चिंतन करिले ,हरि के शरण रह

तजि सकल मान सम्मान

हे साधो चिंता चिता समान

हे साधो चिंता चिता समान

जग माया के गठरी ,ठगिनी ..रे साधो

चारों जुग परमान

काम ,क्रोध ,मद,लोभ ,सकल तजि

सुमिरि सियापति राम

हे साधो चिंता चिता समान

हे साधो चिंता चिता समान

धर्मेंद्रनाथ त्रिपाठी “संतोष “

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